बुनु थारू- मनै सामाजिक प्राणी हो। ओहेसे हमे्र जियक लग समाजसँगे घुलमिल हुइना जरुरी बा। सँस्कृति समाजके एकठो अभिन्न अंग हो। संस्कृति समाजके किल नाही देशके फेन सुन्दर गहना हो। अपन समाजके ओ देशके इज्जत बचाइलक लग अपन सँस्कृति सँरक्षण कैना जरुरी बा।
थारू एक आदिवासी जनजाति हो। थारू मेरमेरिक चालचलन, भेषभुषा, लवाइखवाइ, गहना गुरिया, साँस्कृतिक झाँकी आदिले धनी जात हुइँट। थारू जाति नेपालके जनसङख्या मे फेन चौथा नम्बर मे परठ। ओहे मारे फेन थारू जातिन्के भाषा, भेष, सँस्कृति जोगाइक पर्ना जरुरी बिल्गाइठ। युवा कलक देशके दक्ष जनशक्तिके रुपमा रठाँ। ओइने अपन सँस्कृति सँरक्षणमे महत्वपूर्ण भूमिका खेले सेक्ठाँ। ओइने का बात बुझ्ना चाही की अपन भाषा सँस्कृति सँरक्षण हुइ टब टे अपन फेन सही पहिचान स्थापित करे सेक्जाइ। जनसङख्या ढेर रलेसे फेन थारू बहुट पक्षमे अपन अधिकारसे बञ्चित बटाँ। चाहे सरकार बनैना के मूल प्रवाहमे होए या अन्य सरकारी क्षेत्रमे थारू जाति मन्के पिछरल बटाँ। अप्की हेरी, सुशिल कोइरालाके मंत्रीमण्डलमे एकठो थारु फेन नै अँटैलाँ।
जब सरकारमे हमार मनैए नै रहिही, हमार काम कैडेउ कैहके चिल्लैना बेकार बा। ओहेमारे हम्रे युवा एकचो का मनन कैना चाही कलेसे सरकारहे किल यी कैडे, उ कैडे कैहके समय गँवइनासे अपनेही अपन सँस्कृति जोगाइकतन पहल करे परल। जस्टे की मै कुछ उदाहरण यहाँ प्रस्तुत करे जाइटु। मेची से महाकाली तक थारून्के पहिरन, लवाइखवाइ, बोलीचोली, नाच, गीत फरक बा। मने टब्बो पर सक्कु थारू एक हुइटँ। यी सब हमार साँस्कृतिक पहिचान ढिरे ढिरे हेरैटी जाइटा ओ एकदिन लोप हुइसेक्ना फेन अवस्था आइसेकी। आजकाल टे आब आधुनिकीकरणके जबाना। मनै पहिलक नन्हे लहङगा, चोल्या, आउर साँस्कृतिक पहिरन घालक् छोरटी बटाँ। हरदम आपन लगाम लगाइ फेन समय परिस्थिती नैडेहठ। मने अपन पहिरन प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण ढरना चाही। जस्ते की मै हर साल माघीमे अपन थारू पहिरनमे गहना गुरियासहित माघी महोत्सव मनाए जैठु। यी छोटमोट कदम फेन अपन सँस्कृति सँरक्षणके लग टेवा पुगाइटा जसिन लागठ।
माघी महोत्सव बात बत्वाइबेर हम्रे वहाँ अपन अपन थारू पहिरन मे सजल टे देख्बी मने गहना गुरिया बहुट कम मनै लगाइल देख्बी। धेर हस थारून्के गहना चाँदी ले बनल रठिन्। असकल मेरमेरिक आधुनिक गहना ओ सोनक मोहले यी गहना गुरिया बेचलक कारण फेन थारून्के अपन मौलिक गहना हेरैटी जाइटीन्। डोसुर का बात हो कलेसे अजकलिक थारून्हे अपन भाषा बोल्ना लाज ओ कर्रा लग्ठिन्। मनै जट्ना आधुनिक बन्लेसे फेन अपन सँस्कृति नै छोरना चाही। प्रायः बजार ओर बैठ्ना थारू अपन लर्कापर्कन् हे नेपाली, अंग्रेजी किल बोलक सिखैठाँ। ओइनहे का लग्ठिन् कलेसे नेपाली बोल्लेसे ठनिक बरवारी ओ सहरिया बनजावी, मने ओइने नैसोच्ठाँ कि अपन सँस्कृति हे ओइने अपनेहे जो हेला करटटाँ। बजार मे बैठ्लेसे नेपाल वा अन्या कोने भाषा सिखैना ठिके हो मने अपन भाषा फेन लर्कन्हे सिखाइपरठ टब टे ओइनेहे अपन सँस्कृति संरक्षण प्रति लग्ना प्रेरणा मिल्हीन्। ह्मार थारू दिदीबहिनी, डाइ, काकीन्के डेल्वा, भौँका, देलई ओ आउर मेरमेरिक चिज प्राकृतिक रेसा मुँज, से बिन्ठाँ। ओइनके सीप मेसिनले फेन सुग्घर रठिन् कौनो तालिम प्राप्त मनै हस् मने वहाँलोग उ अपन सीप गीफट, पहुरा, दाइजो देना मे किल सीमित कैले बटाँ। यदि यी मेहनती हाठले बनाइल सुन्दर सीप बजारमे प्रवर्द्धन करे सेक्जाइ कलेसे आम्दानी ओ सँस्कृति क सँरक्षण दुनु हुइना रहे। ओकर लग इच्छुक महिलन्हे प्राकृतिक रुपमे खेर गइलक ओइसिन चिज हे उचित सँरक्षण कैके ओइनहे आउर मेर मेरिक बुट्टा बनैना तालिम के अवस्था सिर्जना कैना चाही थारू युवा। आउर का बात बा कलेसे फेन एकठो साँस्कृति म्युजियम फेन सहयोग करे सेकठ। यदी हम्रे थारू सँस्कृति झल्कैना चीज ओ म्यूजीयम ढारे सेक्जाइ कलेसे उ फेन सँस्कृति सँरक्षण मे धेर सहयोग पुगाइ सेक्जाइठ।
हमार संस्कृति आउर जातिन्के सँस्कृतिले पक्के फेन भिन्न ओ मौलिक बा। हमार मौलिक सँस्कृति ओ हमार पहिचान बचाइकतन हम्रे युवा एकजुट हुइ परल। चाहे अपन मातृभाषा थारू भाषा, बोल्के होस् या थारू सँास्कृतिक सम्मेलनमे भाग लेके होस् या अपन सँस्कृतिके लग आवश्यक पहल होस् जसिक फेन अपन सँस्कृति बचाइकतन हम्रे युवा लागे परना जरुरी बिल्गाइठ। समाजमे अपन दरिलो उपस्थिति ओ पहुँच बराइहक तन हमे्र युवा आझुसे हाठमे हाठ मिलाके जुटे परना जरुरी बिल्गाइठ तब किल थारू फेन सक्षम आदिवासी जनजाति मे गन्जइहीँ।
साभारः २१ फागुन , गोरखापत्र




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