शिवा चौधरी-
बरष भरमे एकचो आइल दशिया तिउहार।
लेके आइल सबके घरेम खुशिक बौछार।।
घर अंगना रंगीन बा फूला ओ रंगले।
मुस्कान बा चेहरामे लर्कापर्का सबमे।।
करी सामा दशियाक हम्रे फकाके नाही बचाके।
चलि आइ दशिया मनाइ फुटके नाही जुटके।।
रिति बा रिवाज बा चालचलन अपने बा।
परमपराके संस्कृति नाचगान ओतने बा।।
आपन संस्कृति आपन चलन अपने भेषभुषा।
तितमिठ आपन मेहनत अपने खानापिना।।
राहरंगी करके मनाइ नाही भेदभाव।
कौन छोटि कौन बडा सबके आर्शिबाद।।
रंगीचंगी फुलाले सजल रहे घर अंगना।
सुखि रहि खुशि रहि दशियाक शुभकामना।।
दाङ देउखुरी




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