बारामे थारुके ऐतिहासिक हबेली

सहदेव चौधरी

बाराके कोल्हबी नगरपालिका ३ मे एकटा थारूके ऐतिहासिक हबेली छै । बारा जल्लिाके कोल्हबी नगरपालिकासे पछिमे चारुदसिर खेत या बीचमे जुगुवा गाममे रहलाहा यी ऐतिहासिक हबेली जुगेश्वर निवासके नामसे यैठनाके लोकसब चिन्हैछै ।
बि‍.सं. २००१ सालमे स्थापना भेल यी हबैली बनाइले भारतसे मिस्त्री लाइबने रैहै । भारतके लगपास मजफरपुर या मोतिहारीसे कालिगढसब आइनके यी हबैली तयार भेल्छै कैहकै जुगेश्वरके नाती उपेन्द्र चौधरी कहलकै ।

हबैली खासक्याके सुर्की चुना, काठ, इँटा या प्लाष्टरसे बनलछै । ताबो पाछे सिमेन्टसे बनाइने छै । येकरलेल भारतले आधुनिक कालिगढसब आनैले परलरैहै ।
हबैली वि.सं. १९९१ सामे सुरु भेलरैहै । यी हबैली तयार हैले १० बरस लागलै कैहकै जुगेश्वरके नाती उपेन्द्र चौधरी कैहलकै । यी हबैली तीन मन्जीला छै ।
जुगुवा गाममे रहल हबैली वातावरण मैत्री छै । कथिले त हबैलीके बीचमे खुला छोरल छै । औरो भाग बौहौत निकसे खाइहके सिङारपटार करनेछै । हबैलीके स्वरुप रजामहरजा बैठैबला दरबार जखा छै । हबैलीके भितामे बुटेबुटा, झ्यालमे बुटेबुटा, केबारमे बुटेबुटा रहलछै । यसै थारुके हबैली काठमे कलाकौशलसे भोरलपुरलछै ।

मतर हबैलीके कोइयो ने रेखदेख नै करनेछै । तैदुवारे हबैलीके अगामे, भितरमे झार जनैमगेलछै । केबार, झ्यालके घुन खाइले सुरु कैरदेनेछ्रै । मतर हबैलीमे लागल झ्याल ढोकाके काष््टकला अखैनतक जैहनङके तैहनङ छै । येकर संरक्षण नै भेलछै ।
जुगुवाके यी ऐतिहासिक सम्पत्तिके बाहारमे चिन्हाइले कोनोकतैसे पहल नैभेल्छै । कथिले त पारिबारिक सदस्यसब यी हबैलीके पुरातात्विकलखासे नै देखलाके कारणसे ऐतिहासिक हैतोभी सरकार या स््थानीय नगरपालिका येकरा संरक्षण करैले नै चासो देनेछै ।

करीब १० कटठा क्षेत्रफलमे बन्याल यी बरी छनगर हबैली संरक्षणके नैकैलासे गुमनाम छै । मतर स्थानीय तह येकरा संरक्षण करैले चाहतै त हबैलीके राष्ट्रि संग्रहालय बनाइले मिल्तै केहके स्थानीय सब कैहैछै ।

“नेपाल सरकार, पुरातत्व विभागसे एक सय बरस पुराना ऐतिहासिक धरोहरके संरक्षण दैतयालछै । पुरातत्व विभागसे एको चोटी कोइयो ने निरीक्षण करैले यी हबैलीमे येल्छै”, उपेन्द्र चौधरी कैहैछै , “ अखैनतलक ने पुरातत्व विभागके कर्मचारी यी हबैलीके निरीक्षण करैले येलछै ने त स्थानीय सरकारे । सबटा देख देखके चैलजाइछै । मतर गामेगाम बौहौत चर्चित छै ।”

त्यैसमयमे राणाखल्टाके चन्द्रशमेर, बीर शमशेर,मानेहन शमशेर यै हबैलीमे हाथिमे चैहैरके येलरैहै । या नेपालमे प्रजातन्त्र येलाके बाद बीपी कोइराला, गणेशमान सिंह, गिरिजाप्रसाद, सुशील कोइराला, शेरबहादुर देउवा, प्रकाशमान सिंह, विजय कुमार गच्छदारखजा नेतासब तराइमे कोनो चुनावी सभा या नेतापनि करै याबै त येहा जुगेस हबैलीमे भात खेनेछै या राइत रहलछेल कैहके उपेन्द्र चौधरी केहल्कै ।

अखैन परिवारके सदस्यसब हबैलीके अखापखामे घर बनाइनेछे । मतर हबैली संरक्षणके लेल गुहाइर रहलछै । भैयारीसब यी हबैलीके भत्काइले ताकनेछेलै मतर फाटमे जुगेसके जेठका बेटाके परलासे यी अखैनतक रहल छै । मतर ढैहगेलछै । हबैलीके दुईतलामे पीपरके गाछ जनैमगेलछे ।
उपेन्द्र चौधरी कैहैछै, ‘जैहिया जुगेश चौधरी जिते छैलै तैहिया ५०० बिगहाके मालिक छेलै । वै आइरपाइटमे जुगेस बरका जमिनदार छैलै । तखैन तराइमे थारु जाइत मात्रे रहलछैलै । दोसर जाइतके आगम ने भेलछेलै ।’

– गोरखापत्र थारु भाषा पृष्ठांकमा प्रकाशित




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